एग्रोफ्रेश सॉल्यूशन्स की शुरुआत एक छोटे से ग्रामीण उद्यम के रूप में हुई थी। मक़सद था किसानों की मदद करना ताकि फसल कटने के बाद होने वाला नुकसान कम हो सके। संस्थापक प्रदीप सिंह और मीरा जोशी खुद किसान परिवारों से थे और उन्होंने अपनी आँखों से देखा कि गर्म और नमी वाले मौसम में ताज़ा सब्ज़ी-फलों को संभाल कर रखना कितना मुश्किल है।
उनका हल क्या था? सोलर-पावर्ड कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स, जिन्हें गाँव में लगाया जा सके, साफ़ ऊर्जा पर चलें और छोटे किसान भी आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
लेकिन एक दिक्कत सामने आई – टेक्नॉलॉजी और हिम्मत तो थी, पर स्केल करने के लिए पूँजी नहीं थी।
चैलेंज
- इन्वेस्टर नेटवर्क की कमी: ग्रामीण महाराष्ट्र में होने के कारण वीसी सर्कल्स तक पहुँचना मुश्किल।
- अवेयरनेस गैप: उनकी पिच उन इन्वेस्टर्स तक पहुँच ही नहीं रही थी जो सस्टेनेबिलिटी और ग्रामीण विकास में रूचि रखते हों।
- स्केलिंग में रुकावट: फंड्स न होने से बड़े स्तर पर यूनिट्स बनाना और डिस्ट्रिब्यूशन बढ़ाना नामुमकिन था।
वेंचर विस्तर से कनेक्शन
2023 की शुरुआत में एग्रोफ्रेश ने वेंचर विस्तर पर अपनी डिटेल्ड पिच प्रोफ़ाइल बनाई। इसमें शामिल था:
- कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स की टेक स्पेसिफिकेशन्स और कॉस्ट एफिशियंसी।
- इम्पैक्ट मेट्रिक्स – पायलट किसानों के लिए 35% तक पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस में कमी।
- किसानों के टेस्टिमोनियल्स जिन्होंने शुरुआती यूनिट्स से फायदा पाया।
प्लेटफार्म के इंडस्ट्री और इम्पैक्ट फ़िल्टर्स का इस्तेमाल कर उनकी पिच दो क्लीन-टेक फोकस्ड एंजल इन्वेस्टर्स की नज़र में आई, जिनका झुकाव ग्रामीण इनोवेशन की तरफ़ था।
नतीजे
सिर्फ़ तीन महीने में, प्रोफ़ाइल लाइव होने के बाद:
- फंडिंग मिली: 80 लाख रुपये दो एंजल इन्वेस्टर्स से।
- स्ट्रैटेजिक मेंटरशिप: मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन स्केल करने पर गाइडेंस।
- मार्केट एक्सपैंशन: 2 ज़िलों से बढ़कर 18 महीनों में 10 राज्यों तक पहुँच।
अब उन इलाकों के किसानों को सस्ती कोल्ड स्टोरेज सुविधा मिल रही है, जिससे बर्बादी कम हुई और उनकी बेचने की ताक़त बढ़ी।
रिज़ल्ट्स और इम्पैक्ट
- 50+ कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स ग्रामीण इलाकों में लगाए गए।
- औसतन किसानों की आमदनी 20–25% तक बढ़ी, क्योंकि फसल कम खराब हुई।
- बुल्क प्रोडक्शन और लॉजिस्टिक्स के ऑप्टिमाइज़ेशन से 15% कॉस्ट कम हुई।
फ़ाउंडर की बात
“वेंचर विस्तर ने हमें सिर्फ़ पैसा नहीं दिलाया, बल्कि ऐसे पार्टनर्स से जोड़ा जो हमारे सोशल और बिज़नेस इम्पैक्ट को सच में समझते हैं।”
— प्रदीप सिंह, को-फाउंडर, एग्रोफ्रेश सॉल्यूशन्स
की-टेकअवे
- साफ़ और इम्पैक्टफुल पिच, जिसमें सोशल और इकॉनॉमिक दोनों फ़ायदे हों, सही इन्वेस्टर्स को आकर्षित करती है।
- जियोग्राफिक दूरी अब कैपिटल तक पहुँचने में रुकावट नहीं है, अगर सही प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जाए।
- फंडिंग के साथ अगर मेंटरशिप मिले, तो ग्रोथ कई गुना तेज़ हो जाती है।
